

चलो मिलते हैं
मेरे प्यारे प्यारे भाइयों और बहनों को मेरा अर्थात शुभ्रा का प्यार भरा नमस्कार।
इससे पहले कि आप मेरी इन रचनाओं को पढ़ें,मेरे इस वेब साइट का अनुसरण करें व इसे पसंद करें मैं आपको अपने बारे में कुछ बताती हूँ।
जैसा कि मेरा नाम शुभ्रा है इसका अर्थ ही होता है उज्ज्वल पवित्र शुभ करने वाली आदि। हिन्दू धर्म में सुर संगीत एवं विद्या कि देवी माँ सरस्वती का एक नाम शुभ्रा भी है।
वर्तमान भारत में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मेरा जन्म हुआ। अरे वही बलिया जिला जो महर्षि भृगु जी की तपोस्थली है व शिव जी की प्राचीन नगरी काशी (वर्तमान वाराणसी) के पास पड़ता है।
मेरी माता जी श्रीमती पुष्पा सिन्हा एवं पिताजी श्री अरुण कुमार सिन्हा एक अध्यापक एवं अध्यापिका हैं जिससे पढने-पढ़ाने का संस्कार मुझे घर से ही मिला। मैं पढ़ने में सदा अव्वल व अध्यापक-अध्यापिकाओं की लाडली छात्रा रही।
हिंदी साहित्य व संगीत से स्नातक व हिंदी साहित्य से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूर्ण करने के पश्चात प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से मैंने शास्त्रीय गायन में संगीत प्रभाकर किया।
तत्पश्चात मैं एक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षण का कार्य करने लगी। अध्यापक बनने की प्रेरणा मुझे अपने माता-पिता से ही मिली।
जब मेरा विवाह श्री अखौरी मिथिलेश कुमार जी के साथ हुआ मैं झारखंड प्रदेश के गुमला जिले में आ गयी।
मुझे साहित्यिक व धार्मिक किताबें पढ़ना,कविताओं की, कहानियों की रचना करना संगीत सुनना व गाना गाना हारमोनियम बजाना बहुत ही अच्छा लगता है।
अपने इन्हीं रुचियों के कारण मैं अपनी रचनाओं को इस वेबसाइट के माध्यम से आप तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास कर रही हूं।
आशा करती हूँ कि आप सब मेरी त्रुटियों को ध्यान न देते हुए मेरे इस छोटे से प्रयास को सराहेंगे एवं पसंद करेंगे। -
. . . . आपकी बहन 🙏🙏🙏 शुभ्रा
